“बिहार के युवा और विकसित भारतीय राज्यों के युवाओं की सोच और दृष्टिकोण में अंतर”

प्रस्तावना

भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहाँ हर राज्य की संस्कृति, भाषा, जीवनशैली, शिक्षा प्रणाली और सोच का तरीका भिन्न होता है। बिहार, जो एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है, आज भी कई विकासशील राज्यों की सूची में शामिल है। वहीं दूसरी ओर, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे राज्य विकसित माने जाते हैं। इन राज्यों के युवाओं की सोच और दृष्टिकोण में एक अलग प्रकार की व्यावहारिकता, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति स्पष्टता दिखाई देती है। इसी संदर्भ में यह लेख बिहार के युवाओं और भारत के विकसित राज्यों के युवाओं के सोच और दृष्टिकोण के अंतर को उजागर करने का प्रयास है।


1. शिक्षा प्रणाली और उसका प्रभाव


बिहार के युवा:

बिहार में शिक्षा व्यवस्था अभी भी कई समस्याओं से जूझ रही है। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कमजोर है, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती। निजी संस्थान भी ज़्यादातर व्यवसायिक दृष्टिकोण से चलते हैं, जहाँ केवल परीक्षा पास करवाना ही लक्ष्य होता है। यहाँ के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, BPSC) पर अधिक केंद्रित रहते हैं, जिससे उनकी सोच सीमित हो जाती है और वे रचनात्मक या उद्यमशील विकल्पों के बारे में कम सोचते हैं।


विकसित राज्यों के युवा:

इन राज्यों में शिक्षा का स्तर उच्च है। स्कूल और कॉलेजों में नवाचार (Innovation), व्यावहारिक शिक्षा (Practical Learning), और उद्यमशीलता (Entrepreneurship) को बढ़ावा दिया जाता है। वहाँ के युवा केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्टार्टअप्स, रिसर्च, तकनीक और कला जैसे क्षेत्रों में भी अपना करियर बनाते हैं।


2. सामाजिक और पारिवारिक सोच का प्रभाव


बिहार के युवा:

यहाँ के समाज में पारंपरिक सोच हावी है। अधिकतर परिवार अभी भी मानते हैं कि “अच्छी नौकरी” का मतलब सरकारी नौकरी है। शादी, कैरियर और जीवनशैली के फैसलों में माता-पिता की भूमिका अधिक होती है। स्वतंत्र सोच को प्रोत्साहन कम मिलता है, जिससे युवाओं में आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता में बाधा आती है।


विकसित राज्यों के युवा:

यहाँ के परिवार आधुनिक और खुले विचारों वाले होते हैं। वे अपने बच्चों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता देते हैं। चाहे करियर हो या व्यक्तिगत जीवन, युवा अपनी पसंद के अनुसार निर्णय लेते हैं। इस सोच से उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना उत्पन्न होती है।


3. रोजगार और उद्यमिता के प्रति दृष्टिकोण


बिहार के युवा:

यहाँ के युवा अधिकतर नौकरी की तलाश में रहते हैं। व्यापार या स्टार्टअप को जोखिम भरा मानते हैं। बहुत कम युवा होते हैं जो व्यवसायिक मानसिकता अपनाते हैं। इसका एक कारण संसाधनों की कमी, सही मार्गदर्शन का अभाव और असफलता का डर है। व्यापार को अब भी “गैर-प्रतिष्ठित” माना जाता है।


विकसित राज्यों के युवा:

यहाँ के युवा स्टार्टअप, फ्रीलांसिंग, डिजिटल बिज़नेस और अन्य नवाचारों में सक्रिय रहते हैं। उन्हें स्कूल स्तर से ही उद्यमिता की शिक्षा दी जाती है। समाज भी व्यापार को सम्मान की दृष्टि से देखता है, जिससे युवाओं को मानसिक समर्थन मिलता है।


4. तकनीकी जागरूकता और उपयोग


बिहार के युवा:

हालांकि स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुँच बढ़ी है, परंतु तकनीक का सकारात्मक और उत्पादक उपयोग अभी सीमित है। अधिकतर युवा सोशल मीडिया, मनोरंजन और गेमिंग में अधिक समय लगाते हैं, बजाय कि तकनीक का उपयोग सीखने, कमाई या उद्यमिता में करें।


विकसित राज्यों के युवा:

वे तकनीक को एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करते हैं। वे ऑनलाइन कोर्स करते हैं, डिजिटल मार्केटिंग, कोडिंग, डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में दक्षता प्राप्त करते हैं। तकनीक उनके लिए एक प्लेटफॉर्म है, जिससे वे अपना कौशल दुनिया को दिखा सकें।


5. अंग्रेजी और संप्रेषण कौशल (Communication Skills)


बिहार के युवा:

यहाँ के युवाओं में अंग्रेजी बोलने और संप्रेषण कौशल की कमी होती है, जो उन्हें राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पीछे कर देती है। शिक्षा व्यवस्था भी व्यावहारिक बोलचाल पर अधिक ध्यान नहीं देती। कई प्रतिभाशाली युवा केवल भाषा के कारण पीछे रह जाते हैं।


विकसित राज्यों के युवा:

वे बचपन से ही अंग्रेजी बोलने और प्रस्तुतिकरण कौशल में निपुण होते हैं। यह गुण उन्हें कॉर्पोरेट, इंटरव्यू, सेमिनार और पब्लिक फोरम में आगे बढ़ने में मदद करता है।


6. जोखिम उठाने की प्रवृत्ति


बिहार के युवा:

जोखिम लेने से डरते हैं। अधिकांश युवा 'सेफ जोन' में रहना पसंद करते हैं। असफलता का डर, सामाजिक आलोचना और आर्थिक असुरक्षा के कारण वे नए क्षेत्रों में कदम रखने से हिचकते हैं।


विकसित राज्यों के युवा:

वे प्रयोग करने में डरते नहीं हैं। चाहे स्टार्टअप हो, नई स्किल सीखनी हो या शहर से बाहर जाकर काम करना – वे नई चुनौतियों को स्वीकार करते हैं। असफलता को सीखने का अवसर मानते हैं।


7. राज्य सरकार और नीति का प्रभाव


बिहार:

यहाँ की नीतियाँ और योजनाएं युवाओं के लिए अक्सर केवल कागज़ों तक सीमित रहती हैं। कौशल विकास, स्टार्टअप सहायता जैसी योजनाएं हैं, पर क्रियान्वयन और जागरूकता की कमी के कारण इनका लाभ वास्तविक ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुँच पाता।


विकसित राज्य:

राज्य सरकारें युवाओं के लिए स्टार्टअप इनक्यूबेटर, स्किल हब्स, रिसर्च ग्रांट्स, और करियर काउंसलिंग जैसी योजनाएं गंभीरता से लागू करती हैं। इससे युवाओं को एक सकारात्मक वातावरण मिलता है।


8. आत्म-छवि और पहचान की समझ


बिहार के युवा:

वे अपनी पहचान अक्सर एक गाँव, जिला या जातीय पहचान तक सीमित करते हैं। राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति बनाने के लिए सोच विकसित नहीं हो पाती।


विकसित राज्यों के युवा:

वे खुद को एक “ग्लोबल सिटीजन” मानते हैं। उनकी सोच सीमाओं से परे होती है। वे जानते हैं कि वे दुनिया में कहीं भी जाकर अपनी प्रतिभा के बल पर पहचान बना सकते हैं।


निष्कर्ष


बिहार के युवाओं में भी अपार प्रतिभा और ऊर्जा है, लेकिन उन्हें सही दिशा, प्रेरणा और संसाधनों की आवश्यकता है। उनके अंदर संघर्ष करने की क्षमता, सीखने की जिज्ञासा और मेहनत करने का जज़्बा है। ज़रूरत है शिक्षा प्रणाली के सुधार की, समाज में सोच परिवर्तन की, उद्यमिता को बढ़ावा देने की और युवाओं में आत्मविश्वास जगाने की।

विकसित राज्यों के युवाओं से सीख लेकर बिहार के युवा भी अपनी सोच को विस्तार दे सकते हैं। वे भी नौकरी देने वाले बन सकते हैं, न कि सिर्फ नौकरी ढूँढने वाले। जब बिहार के युवा आगे बढ़ेंगे, तो न केवल राज्य का बल्कि पूरे देश का भविष्य उज्जवल होगा।


क्या करें आगे? (कुछ सुझाव)

  • युवाओं को स्कूल स्तर से ही करियर और उद्यमिता की शिक्षा दी जाए।


  • सफल बिहारी उद्यमियों की कहानियाँ युवाओं तक पहुँचाई जाएं।


  • डिजिटल कौशल, अंग्रेजी और संप्रेषण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।


  • राज्य में Startup Bihar जैसी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाए।


  • बिहार में एक सकारात्मक युवा आंदोलन शुरू हो, जो सोच को बदले।